टिहरी : मुखेम बाईपास सड़क पर घमासान, गलत एलाइनमेंट का आरोप, किसानों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
टिहरी : मुखेम बाईपास सड़क पर घमासान, गलत एलाइनमेंट का आरोप, किसानों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच


ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के तहत प्रस्तावित यह मोटर मार्ग क्षेत्र के 13 से 14 गांवों की आवागमन सुविधा और विकास को ध्यान में रखते हुए स्वीकृत किया गया था। लेकिन बाद में कुछ स्वार्थी तत्वों के दबाव में सड़क के मूल उद्देश्य और एलाइनमेंट में बदलाव कर दिया गया। आरोप है कि वर्तमान मार्ग को अनावश्यक रूप से घुमावदार बनाया गया है, जिससे कुछ विशेष क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है जबकि मुखेम गांव के अधिकांश मोहल्लों को इसका अपेक्षित फायदा नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के दौरान कई किसानों और काश्तकारों की कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। कुछ परिवारों की स्थिति ऐसी हो गई है कि वे भूमि-विहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण और सड़क कटान से पहले प्रभावित लोगों की सहमति नहीं ली गई और न ही उन्हें पर्याप्त जानकारी दी गई।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान योजना के तहत दो पुलों के निर्माण का प्रस्ताव है, जबकि मार्ग का पुनर्सरेखन (री-अलाइनमेंट) कर केवल एक पुल के माध्यम से बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे सरकारी धन की बचत होने के साथ-साथ अधिक गांवों को सड़क सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क मार्ग को संस्कृत पाठशाला मुखेम से नगुड़ा-नामेथोक मार्ग से जोड़ने की संभावनाओं का तकनीकी परीक्षण कराया जाए, ताकि मुखेम, पोखरी और धंगड़गांव क्षेत्र के विद्यार्थियों को राजकीय इंटर कॉलेज तोलीसैंण सहित अन्य शिक्षण संस्थानों तक सुगम आवागमन सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क के सर्वेक्षण, एलाइनमेंट और निर्माण प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने, प्रभावित किसानों की आपत्तियों को सुनने तथा परियोजना को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप पुनः “कंडियाल गांव-धंगड़गांव-पोखरी-मुखेम बाईपास मोटर मार्ग” के रूप में विकसित करने की मांग की है। अब देखना होगा कि विभाग और प्रशासन ग्रामीणों की इन मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।



