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टिहरी : देवभूमि परिवार पहचान कानून पर उठे सवाल, राकेश राणा बोले– मूल निवासियों के अधिकारों से नहीं होना चाहिए समझौता

सर्वदलीय बैठक और व्यापक जनसंवाद की मांग, कहा– कानून लागू करने से पहले जनता व राज्य आंदोलनकारियों को विश्वास में लेना चाहिए था

टिहरी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के कार्यकारी अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए “देवभूमि परिवार पहचान” कानून पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना व्यापक जन-परामर्श, सर्वदलीय सहमति और राज्य आंदोलनकारियों व आम जनता को विश्वास में लिए इतना महत्वपूर्ण कानून लागू किया है, जिससे प्रदेश के मूल निवासियों में चिंता और आशंका का माहौल बना है।

राकेश राणा ने कहा कि कानून के तहत उत्तराखंड में 15 वर्ष से निवास कर रहे प्रत्येक व्यक्ति को “देवभूमि परिवार आईडी” दिए जाने का प्रावधान किया गया है। उनका कहना है कि उत्तराखंड राज्य का गठन केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि मूल निवासियों के अधिकारों, रोजगार, जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि भविष्य में इस व्यवस्था के माध्यम से सरकारी योजनाओं, सुविधाओं, रोजगार और अन्य अधिकारों में मूल निवास और सामान्य निवास के बीच का अंतर समाप्त होता है, तो यह राज्य आंदोलन की मूल भावना के विपरीत होगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस संबंध में सभी आशंकाओं का स्पष्ट जवाब दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि मूल निवासियों के संवैधानिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

राकेश राणा ने राज्य सरकार से कानून पर पुनर्विचार करने, सर्वदलीय बैठक बुलाने तथा राज्य आंदोलनकारियों, सामाजिक संगठनों, युवा प्रतिनिधियों, विधि विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ व्यापक विमर्श के बाद जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेने की मांग की।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा प्रत्येक उत्तराखंडवासी का दायित्व है। राज्य के विकास के साथ-साथ मूल निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा भी समान रूप से सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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