Tehri Garhwal

देवभूमि परिवार कानून में 15 वर्ष की कट-ऑफ का विरोध, राज्य आन्दोलनकारी मंच ने 1985 तक अवधि तय करने की उठाई मांग

उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मंच ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह पंवार ने भी किया समर्थन

टिहरी । उत्तराखंड राज्य आन्दोलनकारी मंच, टिहरी ने बुधवार को अपर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर देवभूमि परिवार कानून में शामिल होने के लिए निर्धारित 15 वर्ष की कट-ऑफ अवधि का विरोध किया। मंच ने मांग की कि इस अवधि को बढ़ाकर वर्ष 1985 तक लागू किया जाए, ताकि केवल लंबे समय से राज्य में निवास कर रहे लोगों को ही कानून के दायरे में शामिल किया जाए।

मंच का कहना है कि राज्य सरकार पहले ही मूल निवास प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर उत्तराखंड के मूल निवासियों की भावनाओं की अनदेखी कर चुकी है। अब देवभूमि परिवार कानून में 15 वर्ष की निवास अवधि निर्धारित करना भी राज्य के मूल निवासियों के हितों और अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार उत्तराखंड में 15 वर्ष का निवास पूरा करने वाला कोई भी व्यक्ति देवभूमि परिवार कानून के तहत पंजीकरण का पात्र बन जाएगा और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकेगा। मंच ने इसे राज्य की मूल भावना और स्थानीय लोगों के अधिकारों के विपरीत बताया।

आन्दोलनकारी मंच ने यह भी कहा कि सरकार एक ओर प्रदेश में जनसंख्या परिवर्तन (डेमोग्राफी चेंज) पर चिंता जताती है, वहीं दूसरी ओर 15 वर्ष की समय सीमा तय कर ऐसे प्रावधान लागू कर रही है, जिससे भविष्य में बाहरी लोगों को भी देवभूमि परिवार का दर्जा मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। मंच का कहना है कि इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और देवभूमि की छवि प्रभावित हो सकती है।

मंच ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि देवभूमि परिवार कानून के तहत शामिल होने की कट-ऑफ अवधि 15 वर्ष के बजाय वर्ष 1985 तक निर्धारित की जाए और जनभावनाओं के अनुरूप कानून में संशोधन किया जाए।

इस मांग का कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह पंवार ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि परिवार कानून बनाते समय राज्य की मूल भावना, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय लोगों के अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए कानून के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और व्यापक जनहित में आवश्यक संशोधन करने की मांग की।

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