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टिहरी : जांच के नाम पर जनभावनाओं को टालना स्वीकार नहीं, निविदा निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन: कुलदीप पंवार

टिहरी : जांच के नाम पर जनभावनाओं को टालना स्वीकार नहीं, निविदा निरस्त होने तक जारी रहेगा आंदोलन: कुलदीप पंवार

टिहरी। पैतृक भूमि संरक्षण समिति के बैनर तले चल रहे आंदोलन के दौरान पूर्व कनिस्ट प्रमुख कुलदीप पंवार ने जिला प्रशासन की जांच समिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की भावनाओं को जांच के नाम पर लंबे समय तक टालना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि समिति का सम्मान है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जांच किस बात की होनी है। यदि प्रशासन को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित भूमि ग्राम पंचायत की है या निजी, तो बिना तथ्य स्पष्ट किए निजी कंपनी के पक्ष में निविदा कैसे जारी कर दी गई।

कुलदीप पंवार ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में पूर्व में भी कई मामलों में जांच बैठाई गई, लेकिन उनका निष्कर्ष लंबे समय तक सामने नहीं आया। उन्होंने भालू प्रकरण की न्यायिक जांच का उदाहरण देते हुए कहा कि तीन महीने बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई, जबकि गांव के गदेरे से ग्रामीणों के पेयजल में कटौती कर निजी कंपनी को पानी उपलब्ध कराने के मामले में रिपोर्ट अगले ही दिन प्रस्तुत कर दी गई। इससे लोगों के मन में जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पहले निविदा की तिथि आगे बढ़ाई गई और अब जांच के नाम पर पूरे मामले को लंबा खींचने का प्रयास किया जा रहा है, जो जनभावनाओं के साथ न्याय नहीं है।

पैतृक भूमि संरक्षण समिति ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि यदि भूमि ग्राम पंचायत की है तो निविदा तत्काल निरस्त की जाए। यदि प्रशासन का दावा अलग है तो संबंधित सभी राजस्व अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं, ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।

समिति ने स्पष्ट किया कि पूरे आंदोलन का नेतृत्व “पैतृक भूमि संरक्षण समिति” के बैनर तले किया जा रहा है। यदि प्रशासन समाधान चाहता है तो उसे सीधे समिति के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करनी चाहिए। समिति का कहना है कि आंदोलन से जुड़े सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जा रहे हैं और निविदा पूरी तरह निरस्त होने तक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

समिति ने कहा कि पैतृक भूमि, चारागाह और ग्राम समाज की संपत्ति किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दी जाएगी। उनका कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी विरासत, अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है।

धरने में पूर्व कनिस्ट प्रमुख कुलदीप पंवार, पूर्व राज्य मंत्री अतर सिंह तोमर, प्रधान संगठन अध्यक्ष युदवीर रावत, राजेंद्र नेगी, बिजेंद्र रावत, दिनेश भंडारी, शीशपाल राणा, भगवान सिंह रावत, नरेंद्र नेगी, प्रभु लाल डोबल, अभिषेक कठैत, रामचंद्र सिंह रावत, बिंदु पंवार, जगदीश देवी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।

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