Tehri Garhwal

टिहरी में लम्पी स्किन डिजीज पर अलर्ट: 39 टीमें गांव-गांव पहुंचीं, पशुओं का टीकाकरण और फॉगिंग अभियान तेज

टिहरी में लम्पी स्किन डिजीज पर अलर्ट: 39 टीमें गांव-गांव पहुंचीं, पशुओं का टीकाकरण और फॉगिंग अभियान तेज

पशुधन में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम को 39 टीमें सक्रिय, गांव-गांव टीकाकरण और जागरूकता अभियान जारी

‎प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पशुओं का टीकाकरण, फॉगिंग और चूने का छिड़काव जारी—पशुपालकों से सावधानी बरतने की अपील

‎टिहरी। टिहरी गढ़वाल में पशुओं में फैल रही लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए पशुपालन विभाग द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि बीमारी के प्रसार को रोकने और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क है। जनपद में टीकाकरण, सैनिटाइजेशन, वेक्टर कंट्रोल तथा पशुपालकों को जागरूक करने का कार्य लगातार किया जा रहा है।

‎मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद में 39 विशेष टीमें गठित की गई हैं, जो प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर जाकर पशुओं का लम्पी वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण कर रही हैं। इसके साथ ही बीमारी के प्रसार में सहायक मक्खी, मच्छर एवं अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए स्थानीय निकायों के सहयोग से प्रभावित ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग तथा चूने का छिड़काव कराया जा रहा है।

‎पशुपालन विभाग द्वारा गांव-गांव जागरूकता शिविर आयोजित कर पशुपालकों को लम्पी स्किन डिजीज के प्रारंभिक लक्षण, बचाव के उपाय तथा संक्रमित पशुओं के रख-रखाव की जानकारी दी जा रही है। पशुपालकों को सलाह दी जा रही है कि पशुओं में बुखार, त्वचा पर गांठें, आंख या नाक से स्राव तथा पैरों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को तत्काल स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

‎उन्होंने पशुपालकों से पशुशाला एवं पशु बाड़े में नियमित साफ-सफाई रखने, मक्खी-मच्छरों से बचाव के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करने तथा नियमित रूप से चूने का छिड़काव करने की अपील की। बीमारी के प्रसार की स्थिति में पशुओं की अनावश्यक खरीद-बिक्री धएवं आवागमन से बचने तथा पशुओं को खुले में चराने के संबंध में भी आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।

‎मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जनपद में स्थिति नियंत्रण में है तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) दिन-रात सक्रिय रहकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि लक्षण दिखाई देने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा विभागीय टीम से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि घाटी वाले क्षेत्रों में पशुशाला के आसपास नीम की पत्तियों का धुआं करने तथा पशुओं को गिलोय का पानी देने की सलाह भी दी जा रही है। विभागीय टीमों द्वारा पशुपालकों को बीमारी से बचाव के संबंध में आवश्यक जानकारी एवं मार्गदर्शन लगातार उपलब्ध कराया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button