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टिहरी : सीमा पर देश की रक्षा, गांव के स्कूल में शिक्षा लाचार! 72 बच्चों को पढ़ा रहा एक शिक्षक

भिलंगना के राजकीय जूनियर हाईस्कूल में वर्षों से शिक्षकों का अभाव, ग्रामीण बोले—देशभक्ति का सम्मान शिक्षा से भी हो

टिहरी । देश की रक्षा के लिए 38 जवान देने वाले भिलंगना विकासखंड के समण गांव का राजकीय जूनियर हाईस्कूल आज खुद शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है। विद्यालय में 72 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की जा रही है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं।

समण गांव की पहचान सेना में सेवा देने वाले युवाओं के कारण पूरे क्षेत्र में है। वर्तमान में गांव के 38 युवा भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि चार सैनिक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी विद्यालय से पढ़कर निकले कई युवा आज विभिन्न सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। बावजूद इसके विद्यालय में शिक्षकों की कमी बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर असर डाल रही है।

ग्राम प्रधान कृष्णा देवी ने बताया कि लगभग दो हजार आबादी वाले समण गांव में प्राथमिक विद्यालय में 92 और जूनियर हाईस्कूल में 72 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वहीं करीब 300 बच्चे राजकीय इंटर कॉलेज धोपड़धार में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शासन और प्रशासन से अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।

स्थानीय ग्रामीण संजय बड़ोनी ने कहा कि समण गांव पलायन को मात देने वाला गांव है, जहां के युवाओं ने सेना और सरकारी सेवाओं में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी गांव के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।

विद्यालय के एकमात्र शिक्षक जोत सिंह चौहान ने बताया कि वह पिछले आठ वर्षों से विद्यालय में कार्यरत हैं और पिछले दो वर्षों से अकेले ही सभी कक्षाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने विद्यालय जॉइन किया था, तब छात्र संख्या 42 थी, जो अब बढ़कर 72 से अधिक हो गई है। पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न सरकारी कार्यों का दायित्व भी उन्हें ही निभाना पड़ता है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है।

खंड शिक्षा अधिकारी भिलंगना सुमेर सिंह कैंतुरा ने बताया कि विद्यालय में एक अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था की गई थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से उन्हें वापस उनके मूल विद्यालय भेज दिया गया। फिलहाल आसपास के विद्यालयों से शिक्षक उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि देश को सैनिक और योग्य नागरिक देने वाले इस गौरवशाली गांव के विद्यालय में जल्द से जल्द पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके और गांव की समृद्ध परंपरा आगे भी कायम रह सके।

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