टिहरी में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज, 11 सितंबर तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण; 15 सितंबर को अंतिम सूची
टिहरी में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया तेज, 11 सितंबर तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण; 15 सितंबर को अंतिम सूची

विशेष गहन पुनरीक्षण में दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा
11 सितंबर तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण, 15 सितंबर को अंतिम निर्वाचक नामावली का प्रकाशन
उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिला अधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय कक्ष में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्राप्त दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण की सुनवाई के संबंध में जनपद के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की गईं। प्राप्त दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया 11 सितंबर 2026 तक पूरी की जानी है तथा 15 सितंबर 2026 को अंतिम निर्वाचक नामावली का प्रकाशन प्रस्तावित है। बताया कि 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित निर्वाचक नामावली के अनुसार जनपद की छह विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 994 मतदान केंद्र तथा 4,63,628 मतदाता हैं। इनमें घनसाली में 85,081, देवप्रयाग में 75,437, नरेंद्रनगर में 79,199, प्रतापनगर में 74,237, टिहरी में 66,877 तथा धनोल्टी में 82,797 मतदाता शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि प्रकाशित निर्वाचक नामावली के उपरांत अनमैप एवं विसंगति की श्रेणी में चिह्नित निर्वाचकों को नोटिस वितरित कर सुनवाई की जा रही है। देवप्रयाग एवं प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र में सुनवाई की अंतिम तिथि 25 अगस्त, धनोल्टी में 27 अगस्त तथा घनसाली, नरेंद्रनगर एवं टिहरी विधानसभा क्षेत्र में 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। जनपद में कुल 1,17,501 नोटिस जारी एवं वितरित किए गए हैं, जिनमें से 82,801 मामलों में सुनवाई की जा चुकी है तथा 34,700 मामले सुनवाई के लिए शेष हैं।
अर्ह नागरिकों एवं निर्वाचकों से प्राप्त दावे-आपत्तियों के संबंध में प्रारूप-6, 6क, 7 एवं 8 के कुल 3,964 आवेदन प्राप्त हुए हैं। पूर्व से लंबित प्रकरणों को मिलाकर निस्तारण हेतु कुल 6,990 प्रकरण उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि दावे एवं आपत्तियों के निस्तारण से पूर्व संबंधित पक्षों को कम से कम सात दिन का स्पष्ट नोटिस दिया जाएगा। आवश्यकतानुसार बीएलओ द्वारा स्थलीय सत्यापन तथा जांच/सुनवाई के बाद प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। प्राप्त दावे-आपत्तियों की सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को प्रत्येक सप्ताह उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे उसका परीक्षण कर सकें। संबंधित सूचियां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड की वेबसाइट तथा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के नोटिस बोर्ड एवं मतदेय स्थलों पर भी जनसामान्य के लिए उपलब्ध रहेंगी।
निस्तारण प्रक्रिया की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बीएलओ, सुपरवाइजर, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा उच्च स्तर पर स्थलीय सत्यापन, परीक्षण जांच एवं पुनः जांच की व्यवस्था रहेगी। बड़ी संख्या में विलोपन संबंधी आपत्तियां प्राप्त होने अथवा किसी एक व्यक्ति के विरुद्ध बड़ी संख्या में विलोपन आपत्तियां प्रस्तुत किए जाने वाले मामलों में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी स्तर से विशेष क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा बिना जांच, संबंधित व्यक्ति को नोटिस एवं उचित अवसर दिए बिना निर्वाचक नामावली से किसी प्रविष्टि को नहीं हटाया जाएगा। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट व्यक्ति जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष अपील कर सकता है। जिला मजिस्ट्रेट के आदेश से असंतुष्ट होने पर निर्धारित अवधि में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष द्वितीय अपील का प्रावधान है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिला अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं निर्धारित नियमों के अनुरूप संपादित करने में सहयोग की अपेक्षा की।
आयोजित बैठक में डीडीओ मो. असलम, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जवाहर सिंह, वरिष्ठ सहायक मनोज भट्ट, भाजपा राजेंद्र प्रसाद डोभाल, जयेन्द्र पंवार, रामलाल नौटियाल, कांग्रेस से देवेन्द्र नौडियाल, लखवीर चौहान, सन्तोष, अरुण सहित अन्य संबंधित उपस्थित रहे।



