सरकारी जमीनों को लीज पर देने के खिलाफ कांग्रेस मुखर, धामी सरकार पर लगाए आरोप
सरकारी जमीनों को लीज पर देने के खिलाफ कांग्रेस मुखर, धामी सरकार पर लगाए आरोप

नई टिहरी। टिहरी जिला कांग्रेस कमेटी ने बुधवार को नई टिहरी में प्रेस वार्ता आयोजित कर उत्तराखंड सरकार की सरकारी भूमि एवं संपत्तियों से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (यूआईआईडीबी) के माध्यम से सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों को निजी कंपनियों को लंबी अवधि की लीज तथा पीपीपी मोड पर देने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस ने दावा किया कि सरकार द्वारा महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित सरकारी भूमि को 90 वर्ष तक की अवधि के लिए लीज पर देने का रास्ता तैयार किया गया है। पार्टी नेताओं के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री की स्वीकृति से संबंधित विभागों की भूमि यूआईआईडीबी को हस्तांतरित की जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि करीब 1200 एकड़ भूमि से जुड़े प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम स्वीकृति दी जा चुकी है, जबकि कई हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं।
जॉर्ज एवरेस्ट और पार्क एस्टेट लीज का मुद्दा उठाया
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने मसूरी के पार्क एस्टेट (हाथीपांव) और जॉर्ज एवरेस्ट संपत्ति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि करीब 142 एकड़ सरकारी भूमि को निजी कंपनी को 15 वर्ष की लीज पर दिया गया और इसके लिए प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये की लीज राशि तय की गई। पार्टी ने सवाल उठाया कि जिस संपत्ति पर सरकारी स्तर से करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उससे मिलने वाली लीज राशि अपेक्षाकृत कम है।
कांग्रेस नेताओं ने इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और निविदा प्रक्रिया में कंपनियों के बीच मिलीभगत के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
सरकारी निरीक्षण भवन और पर्यटन संपत्तियों पर भी सवाल
कांग्रेस ने कहा कि लोक निर्माण विभाग के करीब 25 निरीक्षण भवनों तथा पर्यटन विभाग की कुछ संपत्तियों को निजी हाथों में लीज या पीपीपी मोड पर देने का सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। पार्टी के मुताबिक नैनीताल के पटुवाडांगर की करीब 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और ऋषिकेश स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को लेकर भी लीज/पीपीपी प्रक्रिया शुरू की गई है।
कांग्रेस नेताओं ने निविदाओं की शर्तों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इन्हें इस तरह बनाया गया है कि स्थानीय व्यक्ति या कंपनियों के लिए भागीदारी मुश्किल हो जाती है। पार्टी ने सरकार से इन संपत्तियों की पारदर्शी प्रक्रिया और स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
जनहित की परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने रानीपोखरी क्षेत्र में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय तथा किच्छा के पराग फार्म की भूमि राष्ट्रीय न्यायालयीय विज्ञान विश्वविद्यालय के लिए उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्तावों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस का आरोप है कि जनहित और राष्ट्रीय महत्व की संस्थाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव लंबित हैं, जबकि दूसरी ओर सरकारी संपत्तियों को निजी परियोजनाओं के लिए देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
कांग्रेस ने कहा कि सरकार को सरकारी जमीन और संपत्तियों के उपयोग से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता, सार्वजनिक हित और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकारी भूमि एवं संपत्तियों को निजी हाथों में देने के मुद्दे पर कांग्रेस आगे भी आवाज उठाती रहेगी।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव विजय गुनसोला, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष आशा रावत, शहर अध्यक्ष कुलदीप पंवार, जिला प्रवक्ता आनंद सिंह बेलवाल, प्रदेश सचिव नरेंद्र रमोला, देवेंद्र नौडियाल, जिला पंचायत सदस्य शांति शाह, नवनियुक्त जिला मीडिया प्रभारी लखबीर चौहान, ज्ञान सिंह रावत, इमरान, ममता उनियाल, जोत सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।



