रामगांव न्याय पंचायत का बड़ा ऐलान: पंचायत भूमि की नीलामी का विरोध, 3 दिन में टेंडर रद्द नहीं हुआ तो होगा उग्र आंदोलन
जनप्रतिनिधियों ने सरकार को दी चेतावनी, भूमाफियाओं को जमीन देने की कोशिश बर्दाश्त नहीं; भूख हड़ताल की भी घोषणा

टिहरी जनपद के रामगांव न्याय पंचायत क्षेत्र में पंचायत भूमि की नीलामी को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार 20 जून 2026 को पूर्व प्रधान नत्थी सिंह कैन्तुरा की अध्यक्षता में आयोजित न्याय पंचायत स्तरीय बैठक में ग्राम बौर और रामगांव की पंचायत भूमि की प्रस्तावित नीलामी का सर्वसम्मति से विरोध किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से संरक्षक मंडल का गठन किया गया, जिसमें राज्य मंत्री खेम सिंह चौहान, राज्य मंत्री अतर सिंह तोमर, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख कुलदीप पंवार तथा जिला पंचायत सदस्य शीशपाल राणा को शामिल किया गया। वहीं बैठक के संचालन और समन्वय की जिम्मेदारी विजेंद्र सिंह रावत, ऋषि भट्ट, विक्रम सिंह अधिकारी और दिनेश भंडारी को सौंपी गई।
बैठक में क्षेत्र के विभिन्न ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने भाग लिया। जनप्रतिनिधियों ने प्रस्ताव पारित करते हुए मांग की कि ग्राम बौर और रामगांव की पंचायत भूमि की तत्काल निशानदेही कराई जाए तथा भूमि नीलामी के लिए जारी टेंडर को तुरंत निरस्त किया जाए। साथ ही निशानदेही के बाद पंचायत भूमि से अतिक्रमण हटाकर उसे कब्जा मुक्त कराने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा जिस भूमि को नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है, वह स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत की संपत्ति है। यदि इस भूमि को भूमाफियाओं के हित में नीलाम करने का प्रयास किया गया तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों ने सरकार को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तीन दिनों के भीतर भूमि नीलामी का टेंडर रद्द करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भूख हड़ताल पर भी बैठेंगे।
बैठक में शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य तथा अन्य जनहित से जुड़े कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। इन सभी मांगों और प्रस्तावों को लेकर जिलाधिकारी टिहरी को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया। बैठक की कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज की गई और उपस्थित सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर कर प्रस्तावों का समर्थन किया।



