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चलो देहरादून” का आह्वान: 5वीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस की मांग को लेकर 22 नवंबर को बड़ा आंदोलन

चलो देहरादून" का आह्वान: 5वीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस की मांग को लेकर 22 नवंबर को बड़ा आंदोलन

टिहरी। उत्तराखंड एकता मंच ने शुक्रवार को प्रेस क्लब टिहरी में प्रेस वार्ता आयोजित कर पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को 5वीं अनुसूची (5th Schedule) और ट्राइब स्टेटस दिए जाने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया। मंच के संयोजक अनूप बिष्ट ने कहा कि इस मांग के पूरा होने से पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को संवैधानिक अधिकार मिलने के साथ-साथ वनाधिकार अधिनियम (FRA-2006) के लाभ भी स्वतः प्राप्त हो सकेंगे।

उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 22 नवंबर को सुबह 11 बजे परेड ग्राउंड, देहरादून में विशाल जनसभा और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। मंच ने प्रदेशभर के पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों से “चलो देहरादून” अभियान में शामिल होने की अपील की है।

प्रेस वार्ता में अनूप बिष्ट ने सवाल उठाया कि जब देश के अन्य हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मूल निवासियों को ट्राइब स्टेटस तथा 5वीं या 6वीं अनुसूची जैसी संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है, तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को इससे वंचित क्यों रखा गया है।

मंच का दावा है कि 5वीं अनुसूची लागू होने से रोजगार, शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के अवसर बढ़ेंगे, साथ ही सख्त भू-कानून, मूल निवास 1950, सांस्कृतिक और भाषाई संरक्षण, महिला सुरक्षा, वनाधिकार कानून के तहत भूमिहीन किसानों को अधिकार तथा ग्राम सभाओं को अधिक शक्तियां मिलेंगी।

एकता मंच के अनुसार, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पहले से लागू रहे शेड्यूल डिस्ट्रिक्ट एक्ट-1874, कुमाऊं वन पंचायत अधिनियम-1931 और राजस्व पुलिस व्यवस्था जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज इस मांग को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मंच का कहना है कि राज्य सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे, जिसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत 5वीं अनुसूची और ट्राइब स्टेटस लागू किया जा सकता है।

मंच ने कहा कि यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, पलायन रोकने, हिमालयी संस्कृति के संरक्षण और जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई है।

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