
हरिद्वार। सिडकुल थाना क्षेत्र में लिव-इन संबंध के विवाद में युवती की हत्या कर शव सूटकेस में छिपाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मुख्य आरोपी रोहित को सश्रम आजीवन कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं सह-अभियुक्ता मंजू को साक्ष्य छिपाने के अपराध में पांच वर्ष का सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया गया।
फैक्ट्री में साथ काम, शिवनगर कॉलोनी में लिव-इन
मामला सिडकुल थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार रोहित और सोनम उर्फ वर्षा एक फैक्ट्री में काम करते थे और शिवनगर कॉलोनी में लिव-इन में रह रहे थे। उसी मकान में मंजू भी किराये पर रहती थी।
24 मई 2020 की रात संदिग्ध परिस्थितियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। कमरे के बाथरूम से एक सूटकेस बरामद हुआ, जिसमें युवती का शव छिपाकर रखा गया था। इस सनसनीखेज बरामदगी से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया था।
प्रेम-त्रिकोण बना हत्या की वजह
शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक जांच में सामने आया कि रोहित के दोनों युवतियों से संबंध थे, जिसे लेकर अक्सर विवाद होता था। इसी तनाव के चलते रोहित ने मंजू के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया और साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया।
कोरोना काल में भी नहीं थमी कार्रवाई
तत्कालीन सिडकुल थाना प्रभारी लखपत सिंह बुटोला के नेतृत्व में पुलिस ने शुरुआती जांच से ही मामले को गंभीरता से लिया। अलग-अलग टीमों का गठन कर तकनीकी व भौतिक साक्ष्य जुटाए गए।
कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों के बावजूद पुलिस ने लगातार छापेमारी की। मुख्य आरोपी की लोकेशन ट्रेस कर उसे कौशांबी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, जबकि मंजू को पहले ही डेंसो चौक से पकड़ लिया गया था। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
वर्तमान में लखपत सिंह बुटोला जनपद के हिंडोलाखाल थाना में थाना प्रभारी के रूप में तैनात हैं। इस केस के खुलासे में उनकी सटीक जांच और लगातार दबिश को निर्णायक माना गया।
12 गवाहों के आधार पर सख्त फैसला
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 12 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों और पुख्ता साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने रोहित को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी तथा मंजू को साक्ष्य छिपाने का अपराधी ठहराया।
यह फैसला न केवल एक जघन्य अपराध में न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में की गई पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच किस तरह अपराधियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचा सकती है।



