Tehri Garhwal

टिहरी में संयुक्त खातेदारी की जमीनों पर फर्जीवाड़ा रोकने की मांग, प्रधान संगठन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

टिहरी में संयुक्त खातेदारी की जमीनों पर फर्जीवाड़ा रोकने की मांग, प्रधान संगठन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

नई टिहरी। प्रधान संगठन थौलधार के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह रावत के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिलाधिकारी से मुलाकात कर संयुक्त खातेदारी वाली भूमि के क्रय-विक्रय में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग की। संगठन ने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए रजिस्ट्री से पूर्व ग्राम प्रधान और संबंधित सहखातेदारों की अनापत्ति (एनओसी) सुनिश्चित करने सहित आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने का आग्रह किया।

ज्ञापन में कहा गया कि टिहरी गढ़वाल के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं पैतृक भूमि संयुक्त खातेदारी के रूप में दर्ज है। ऐसे मामलों में भूमि की खरीद-फरोख्त के दौरान लगातार गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कुछ भू-माफिया और बिचौलिये ग्रामीणों की कानूनी एवं आर्थिक जानकारी के अभाव का लाभ उठाकर भूमि का क्रय-विक्रय करा रहे हैं। कई मामलों में एक सहखातेदार अन्य सहखातेदारों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी हिस्सेदारी से संबंधित भूमि का भी विक्रय कर देता है, जिससे लंबे समय तक न्यायालयों में विवाद बने रहते हैं और सामाजिक सौहार्द भी प्रभावित होता है।

प्रधान संगठन ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद घोषणा-पत्र, आपत्ति और अनापत्ति की प्रक्रिया ग्राम पंचायत स्तर पर भेजी जाती है, जबकि रजिस्ट्री संपन्न होने के बाद इस प्रक्रिया का व्यावहारिक महत्व समाप्त हो जाता है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर सहखातेदार न्यायालय में मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं हो पाते और इसका लाभ भू-माफिया उठाते हैं।

ज्ञापन में उत्तराखण्ड भू-राजस्व अधिनियम, 1956, भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भूमि के स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, विधिसम्मत और सभी सहखातेदारों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए।

प्रधान संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की कि संयुक्त खातेदारी वाली भूमि की रजिस्ट्री से पहले संबंधित ग्राम प्रधान से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य किया जाए। साथ ही ग्राम प्रधान यह प्रमाणित करें कि विक्रेता केवल अपने वैध हिस्से की भूमि का ही विक्रय कर रहा है तथा अन्य सहखातेदारों के अधिकार प्रभावित नहीं हो रहे हैं। इसके अलावा सभी सहखातेदारों की जानकारी और सहमति सुनिश्चित करने की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने, रजिस्ट्री के बाद होने वाली आपत्ति एवं घोषणा-पत्र की प्रक्रिया को रजिस्ट्री से पूर्व लागू करने, सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलों एवं उप-पंजीयक कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने तथा भूमि संबंधी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए समयबद्ध जांच व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई।

प्रधान संगठन का कहना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले ग्राम प्रधान और सहखातेदारों की जानकारी एवं सहमति सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू होती है तो भूमि विवाद, फर्जी विक्रय, धोखाधड़ी और अनावश्यक मुकदमेबाजी में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही ग्रामीणों के वैधानिक अधिकार सुरक्षित होंगे, राजस्व अभिलेख अधिक पारदर्शी बनेंगे और प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास भी मजबूत होगा।

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