उत्तराखंड

ठाकुर साहब (प्यार से) तेरा यूँ चले जाना-….😢 मित्र मुकेश पंवार को आखरी सलाम, विनम्र श्रद्धांजलि

ठाकुर साहब (प्यार से) तेरा यूँ चले जाना-....😢 मित्र मुकेश पंवार को आखरी सलाम, विनम्र श्रद्धांजलि

नई टिहरी। (मुकेश रतूड़ी)  जाग जाग हे उत्तराखंड, हे भैरव हे नर्सिंग…. इन पंक्तियों को पत्रकार, राज्य आंदोलकारी, कलाकार मुकेश पंवार अक्सर प्रेस क्लब या किसी अन्य कार्यक्रमों में बरबस ही गुनगुनाते रहता था। लेकिन अब…..। मुकेश मेरा सहपाठी भी था। उसके जाने का दुःख बता पाना सम्भव नहीं है। अरे क्या उम्र थी तेरी। टुकू ,(बिटिया) अभी 10-12 साल और बेटा अभी 2 साल का भी नहीं हुआ। भरापूरा परिवार इस उम्र में छोड़ कर अनंत यात्रा पर चल दिया। मुकेश को पत्रकारिता की बारीकी से समझ थी। खासतौर पर टीवी जॉर्नलिस्म में। एंकरिंग, डिबेट, सवाल पूछना आदि आदि। वह पर्वत जन, उत्तराखंड आजकल, जनपक्ष जैसे पत्रिकाओं से निकला था। कहता था यार नई पीढ़ी के लोग नही कर पा रहे हैं, जैसे उनमें संभवना है। वह सवाल नही पकड़ पा रहे हैं। टीवी पत्रकारिता में टेहरी में मुकेश जैसे गिनेचुने लोग सैलरी पेड़ थे। zee न्यूज जैसा बड़ा बैनर लेकिन घमंडी नहीं। कई बार उससे कुछ मुददों पर मेरी जबरदस्त बहस होती थी। तब मैं उसे ग्रुप (मीडिया व्हाट्सएप ग्रुप) से रिमूव कर देता था। फिर सुबह वह माफी मांगकर ग्रुप में जोड़ने को बोलता था। मैं भी कहता ठाकुर साहब आगे से ऐसा होगा तो नहीं जोड़ूँगा। दिल का बहुत साफ था। उसी ने प्रयास किया था “हेलो टेहरी” डायरी का। जिसमे प्रधान, पंचायत मंत्री, पटवारी से लेकर डीएम, सीएम, राज्यपाल आदि आदि के फ़ोन नंबर। बहुत कामयाबी मिली। फिर उसने हिमवंत आजकल उसका अखबार, पत्रिका शुरू की। टिहरी की पहली डिजिटल डायरी ई-पोस्ट निकाली। प्रयोगधर्मी, जज्बाती और जिद्दी भी।

मुकेश राज्य आंदोलन के प्रणेता स्व. इंद्रमणि बडोनी के पैतृक गांव अखोडी का निवासी था। वह स्व बडोनी के काफी निकट रहा। उसके दादा स्व बडोनी के मित्र थे। और उनके साथ कार्यक्रमों में आते जाते थे।

अफसोस मित्र अब तू सिर्फ यादों में दिल मे रहेगा। अलविदा अलविदा…😢 ठाकुर तू रुला गया रे।

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