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टिहरी : जहाँ लोग छोड़ते हैं गांव, वहाँ कुलानंद बना रहे रोजगार , पाटा से आई प्रेरक सफलता कहानी

टिहरी : जहाँ लोग छोड़ते हैं गांव, वहाँ कुलानंद बना रहे रोजगार , पाटा से आई प्रेरक सफलता कहानी

सफलता की कहानी

“ग्रामसभा पाटा के कुलानंद चमोली: मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से आत्मनिर्भरता की कहानी”

“मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीति से पहाड़ में ग्रीन एनर्जी और स्थायी आय”

टिहरी जनपद के विकासखंड चंबा की ग्रामसभा पाटा के निवासी कुलानंद चमोली ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीति स्पष्ट हो और ज़मीन पर सही ढंग से लागू हो, तो पहाड़ में भी बड़े स्तर का स्वरोजगार सफल हो सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत कुलानंद चमोली ने 200 किलोवॉट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ स्थायी आय और आर्थिक बचत का मजबूत मॉडल बनकर सामने आई है।

इस योजना के तहत राज्य सरकार ने जिलों को भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर A, B, C और D श्रेणी में विभाजित किया है। A श्रेणी के अत्यधिक दूरस्थ पर्वतीय जिलों में अधिकतम सब्सिडी, B श्रेणी के पर्वतीय जिलों में संतुलित सब्सिडी और ब्याज सहायता, जबकि C और D श्रेणी के तराई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।

सभी श्रेणियों में महिलाओं को अतिरिक्त सब्सिडी तथा 3 वर्षों तक वार्षिक ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाती है, ताकि उद्यम शुरू करने का जोखिम कम हो सके।

कुलानंद चमोली B श्रेणी के पर्वतीय जिले से आते हैं, जहाँ पुरुष लाभार्थियों को 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी तथा ₹4 लाख प्रति वर्ष, लगातार 3 वर्षों तक ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है। इसी आर्थिक सहयोग के कारण उन्होंने अपनी सौर ऊर्जा परियोजना को सफलतापूर्वक स्थापित किया।

आज इस सोलर पावर प्लांट से न केवल नियमित आय हो रही है, बल्कि बिजली खर्च में कटौती के चलते उन्हें हर महीने लगभग ₹20,000 से ₹25,000 तक की सीधी बचत भी हो रही है। यह बचत परियोजना की दीर्घकालिक स्थिरता को और मजबूत बनाती है।

यह पहल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस सोच को साकार करती है, जिसमें युवा अपने गांव में रहकर रोजगार पैदा करें, न कि मजबूरी में पलायन करें।

कुलानंद चमोली की यह सफलता कहानी यह साफ दिखाती है कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना एवं टिहरी प्रशासन की प्रतिबद्धता केवल कागज़ों की योजना नहीं, बल्कि ज़मीन पर परिणाम देने वाली ठोस नीति है। सही श्रेणी, सही सब्सिडी और स्पष्ट मार्गदर्शन के साथ उत्तराखंड में ग्रीन एनर्जी के माध्यम से आत्मनिर्भरता अब वास्तविकता बन चुकी है।

कुलानंद चमोली, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “आत्मनिर्भर उत्तराखंड” विज़न को ज़मीन पर उतारने वाले प्रेरक उद्यमी हैं।

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