टिहरी से बड़ी खबर : पदोन्नति, वेतन और पेंशन पर संग्राम, सड़कों से दफ्तर तक ठप हुआ काम
टिहरी से बड़ी खबर : पदोन्नति, वेतन और पेंशन पर संग्राम, सड़कों से दफ्तर तक ठप हुआ काम


उत्तराखण्ड में डिप्लोमा इंजीनियर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है, जिससे राज्य में विकास कार्यों पर व्यापक असर पड़ रहा है। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के चलते आवश्यक सेवाओं को छोड़कर लगभग सभी निर्माण कार्य ठप हो गए हैं।
महासंघ की ओर से बताया गया कि लंबे समय से लंबित 27 सूत्रीय मांगों के समाधान को लेकर पहले चरण और द्वितीय चरण के आंदोलन किए गए, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 23 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई, जो अब और तेज होती जा रही है।
हड़ताल में महासंघ के प्रांतीय सचिव प्रोन्नत ई० सतीश भट्ट, जिला पंचायत प्रांतीय महासचिव ई. मोहित रावत, प्रांतीय महासचिव लघु सिंचाई ३० त्रयंबक गैरोला, जनपद सचिव महासंघ इ० राजेन्द्र सोढ़ी, इं पूजा जोशी इं० शक्ति आर्या ३० गिन्नी वर्मा ३० मोहन सिंह, इं० घनश्याम सैनी, ३० शशांक बधानी इं० गोपाल सैनी इं० आशुतोष बिजल्याण इं० रोहित पंवार, नितिन लेखवार, नरेन्द्र भट्ट आदि समस्त तकनीकि विभागो के डिप्लोमा इंजीनियर्स द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ई. संदीप कौसी और संचालन ई. मोहित रावत ने किया।
टिहरी स्थित निरीक्षण भवन टिहरी में आज इंजीनियर्स ने प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 1 अप्रैल से आवश्यक सेवाओं से जुड़े विभागों के इंजीनियर्स भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
मुख्य मांगें क्या हैं?
महासंघ की 27 सूत्रीय मांगों में से प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
कनिष्ठ अभियंताओं की लंबित वेतन विसंगति का समाधान
10, 16 और 26 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नत वेतनमान लागू करना
वर्ष 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को प्रथम एसीपी में 5400 ग्रेड पे
पेयजल निगम एवं जल संस्थान का राजकीय एकीकरण
सहायक अभियंताओं से उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए समानांतर गैलरी
पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली
ऊर्जा निगमों में प्रोन्नति सीमा 40% से बढ़ाकर 50% करना
कृषि एवं जिला पंचायत विभाग में इंजीनियरिंग ढांचे का पुनर्गठन
उरेडा विभाग में वेतन विसंगति का समाधान
स्थानांतरण एक्ट में अति दुर्गम श्रेणी हेतु संशोधन
सरकार पर बढ़ा दबाव
लगातार बढ़ती हड़ताल के कारण राज्य सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। निर्माण कार्य ठप होने से सड़क, भवन, पेयजल और अन्य विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि आवश्यक सेवाओं के इंजीनियर्स भी आंदोलन में शामिल होते हैं, तो आम जनता को सीधे तौर पर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।



