टिहरी : विकास के दावों के बीच सड़क को तरसता सिलोडा, डंडी-कंडी बनी सहारा
टिहरी : विकास के दावों के बीच सड़क को तरसता सिलोडा, डंडी-कंडी बनी सहारा

टिहरी। प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिलोडा, उपली रमोली के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क मार्ग तक पहुंचाने की मजबूरी बनी हुई है।
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश राणा ने सिलोडा गांव की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश चांद तक पहुंच चुका है, लेकिन उत्तराखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी टिहरी के सीमांत गांवों तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा नहीं पहुंच पाई है।
राणा ने कहा कि लगातार बारिश और खराब मौसम के दौरान ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। किसी व्यक्ति के बीमार होने, बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ने, जंगल में घास काटते समय महिला के दुर्घटनाग्रस्त होने अथवा गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने की स्थिति में उसे डंडी-कंडी के सहारे दुर्गम रास्तों से सड़क तक ले जाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि फिसलन भरे और कठिन रास्तों पर मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं को ले जाना बेहद जोखिमभरा है। समय पर उपचार नहीं मिलने से कई बार गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।
‘डबल इंजन सरकार’ के दावों पर उठाए सवाल
राकेश राणा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की ओर से गांव तक सड़क पहुंचाने की कई बार घोषणाएं की गईं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सिलोडा टिहरी और उत्तरकाशी जनपद की सीमा से लगा अंतिम क्षेत्र है, बावजूद इसके ग्रामीण सड़क सुविधा के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सड़क जैसी बुनियादी सुविधा केवल शहरों और सड़क से जुड़े गांवों का अधिकार है? पहाड़ के अंतिम छोर पर रहने वाले ग्रामीणों को आखिर कब तक आश्वासनों के भरोसे रहना पड़ेगा?
‘घोषणाओं से बाहर निकलकर शुरू हो सड़क निर्माण’
राणा ने सरकार से सिलोडा गांव तक सड़क निर्माण का कार्य तत्काल शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहाड़ के ग्रामीणों को सड़क, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। चुनाव के समय किए जाने वाले वादों के बजाय सरकार को अब धरातल पर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी का है।” सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सिलोडा के ग्रामीणों को सड़क की सुविधा कब मिलेगी और आखिर कब तक मरीजों व गर्भवती महिलाओं को डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाने की मजबूरी बनी रहेगी।



