टिहरी : पैतृक भूमि बचाओ आंदोलन को मिला व्यापक जनसमर्थन, 600 से अधिक ग्रामीणों ने पंचायत भूमि की नीलामी रद्द करने की उठाई मांग
टिहरी : पैतृक भूमि बचाओ आंदोलन को मिला व्यापक जनसमर्थन, 600 से अधिक ग्रामीणों ने पंचायत भूमि की नीलामी रद्द करने की उठाई मांग

टिहरी। ग्राम पंचायत की पैतृक भूमि की प्रस्तावित नीलामी एवं आवंटन के विरोध में आयोजित पैतृक भूमि बचाओ आंदोलन को मंगलवार को व्यापक जनसमर्थन मिला। आंदोलन के तहत आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन में करीब 600 से अधिक ग्रामीणों ने एकजुट होकर पंचायत भूमि की नीलामी एवं आवंटन प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
धरना-प्रदर्शन में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा, वरिष्ठ नागरिक, जनप्रतिनिधि और बुद्धिजीवी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पंचायत भूमि ग्राम समाज की साझा धरोहर है और इसे किसी भी कीमत पर निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा।
सभा में पूर्व कनिष्ठ प्रमुख कुलदीप सिंह पंवार ने कहा कि पंचायत की भूमि केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। उन्होंने कहा कि ग्राम समाज की सहमति के बिना इस प्रकार की नीलामी का प्रयास ग्रामीणों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने नीलामी प्रक्रिया वापस नहीं ली तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने जल, जंगल, जमीन और पैतृक अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे।
धरने को पूर्व राज्यमंत्री अतर सिंह तोमर, राज्यमंत्री खेम सिंह चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मान सिंह रौतेला, प्रधान संगठन अध्यक्ष युद्धवीर रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष ऋषि भट्ट, जिला पंचायत सदस्य शीशपाल राणा, भाजपा महामंत्री दिनेश भंडारी, ग्राम प्रधान नरेंद्र नेगी, प्रमोद उनियाल, यशपाल (ज्यूँदासू), मीनाक्षी कैंतुरा (प्रधान बौर), विजेंद्र राणा, सुनील बिष्ट, प्रभु डोभाल, उप्पू, सुबदेई, सुशीला, अभिषेक, रोबिन, विजेंद्र रावत (ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष), प्रताप रावत, राजेंद्र नेगी (पूर्व मंडल अध्यक्ष), नथी सिंह कैंतुरा, अतर सिंह सजवाण, भाजपा चंबा मंडल अध्यक्ष नीरज खत्री, नरेंद्र रावत, कुंवर सिंह तड़ियाल सहित अनेक जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने संबोधित किया।
सभा में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पंचायत भूमि ग्राम समाज की अमूल्य संपत्ति है और इसकी नीलामी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक पंचायत भूमि की नीलामी एवं आवंटन संबंधी प्रक्रिया पूरी तरह निरस्त नहीं होती, तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान “एक रहें – नेक रहें” तथा “जल, जंगल, जमीन और पैतृक अधिकारों की रक्षा” जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने अपने अधिकारों की रक्षा का संकल्प भी दोहराया।



