टिहरी से बड़ी खबर : पंचायती भूमि की लीज और नीलामी पर रोक लगाने की मांग, प्रधान संगठन पहुंचा डीएम दरबार
टिहरी से बड़ी खबर : पंचायती भूमि की लीज और नीलामी पर रोक लगाने की मांग, प्रधान संगठन पहुंचा डीएम दरबार

नई टिहरी। बौर, रामगांव एवं अन्य ग्राम पंचायतों की सरकारी और पंचायती भूमि को निजी व्यक्तियों, संस्थाओं अथवा कंपनियों को लीज पर देने और नीलामी किए जाने के विरोध में थौलधार प्रधान संगठन ने जिलाधिकारी टिहरी को ज्ञापन सौंपा। प्रधान संगठन के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह रावत के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि ग्राम समाज की भूमि को निजी हाथों में जाने से रोका जाए और प्रस्तावित नीलामी को जनहित में निरस्त किया जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम पंचायतों की सरकारी एवं पंचायती भूमि स्थानीय जनता की सामूहिक धरोहर है, जिसे गांव के विकास, सार्वजनिक उपयोग और भावी पीढ़ियों के हितों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि बौर और रामगांव क्षेत्र में पंचायती भूमि को निजी कंपनियों अथवा व्यक्तियों को लीज पर दिए जाने और नीलामी की चर्चाओं से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और चिंता व्याप्त है।
प्रधान संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसी भूमि का निजीकरण ग्रामीणों के अधिकारों, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक हितों के विपरीत है। संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की कि शासनादेश संख्या 496/VI-III(II)/2020/08(63)/2016 के अंतर्गत 11 जून 2026 को बौर एवं रामगांव में प्रस्तावित 1.577 हेक्टेयर भूमि की निविदा/नीलामी को जनहित में निरस्त किया जाए।
इसके साथ ही संगठन ने मांग की कि ग्राम पंचायतों की सरकारी एवं पंचायती भूमि को किसी भी निजी व्यक्ति, संस्था अथवा कंपनी को लीज, नीलामी या अन्य किसी माध्यम से हस्तांतरित न किया जाए। भूमि का उपयोग केवल विद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल, सरकारी कार्यालय, खेल मैदान, विद्युत उपकेंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं जैसे जनहित कार्यों के लिए किया जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि ग्राम पंचायत की भूमि से संबंधित किसी भी निर्णय से पूर्व संबंधित ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए। प्रधान संगठन ने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों की भावनाओं के विपरीत भूमि का निजीकरण किया गया तो क्षेत्रीय जनता व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होगी।



