दो माह में ही बदहाल हुआ सुमन पार्क, फाउंटेन की लाइटिंग टूटी, ‘I Love Tehri’ सेल्फी प्वाइंट क्षतिग्रस्त
दो माह में ही बदहाल हुआ सुमन पार्क, फाउंटेन की लाइटिंग टूटी, ‘I Love Tehri’ सेल्फी प्वाइंट क्षतिग्रस्त

नई टिहरी। शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल श्रीदेव सुमन पार्क में करीब 1.82 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सौंदर्यीकरण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि उद्घाटन के महज एक माह बाद ही पार्क के विभिन्न हिस्सों में टूट-फूट और अव्यवस्थाएं दिखाई देने लगी हैं।
पार्क के पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य का उद्घाटन 25 मार्च को टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल और नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत द्वारा किया गया था। उद्घाटन समारोह के दौरान ही पालिकाध्यक्ष ने कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी, जो अब सही साबित होती नजर आ रही है।
स्थलीय निरीक्षण में सामने आया है कि पार्क में लगाए गए फाउंटेन के लाइटिंग पैनल उखड़कर पानी में पड़े हैं। कई सजावटी लाइट लैंप टूट चुके हैं, जबकि कुछ ढीले होकर लटक रहे हैं। वहीं, पार्क की दीवारों पर लगाई गई टाइलें भी जगह-जगह से उखड़ने लगी हैं। आकर्षण का केंद्र बने ‘आई लव टिहरी’ सेल्फी प्वाइंट की भी हालत खराब हो चुकी है।
पार्क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि एक माह के भीतर ही निर्माण कार्य जवाब देने लगे, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
यह कार्य जिला विकास प्राधिकरण, टिहरी की ओर से कराया गया था। मामले में नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि जब तक निर्माण कार्य की गुणवत्ता और रखरखाव की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती, तब तक नगर पालिका पार्क को अपने अधीन नहीं लेगी।
वहीं जिला विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता पंकज पाठक का कहना है कि पार्क में स्थानीय लोगों द्वारा भी सामानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग नियमित निगरानी के लिए स्थायी कर्मचारी नहीं रख सकता और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता का आकलन उद्घाटन के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा किया जा चुका है।
अब पार्क की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सार्वजनिक परिसंपत्तियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।


