टिहरी से बड़ी खबर : बिना अनुमति विश्वविद्यालय ने ध्वस्त किया राजकीय धन से बना भवन, वित्तीय अनियमितता के आरोप; जांच की मांग
टिहरी से बड़ी खबर : बिना अनुमति विश्वविद्यालय ने ध्वस्त किया राजकीय धन से बना भवन, वित्तीय अनियमितता के आरोप; जांच की मांग

टिहरी/चंबा। विश्वविद्यालय परिसर में राजकीय धन से निर्मित एक भवन को बिना सक्षम अधिकारियों की अनुमति के ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में समाजसेवी एवं पूर्व नामित सभासद अंकित सजवाण ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा है और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अंकित सजवाण ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय परिसर में पूर्व वर्षों में विधायक निधि एवं ब्लॉक चंबा की ओर से एक भवन का निर्माण कराया गया था। इस निर्माण के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया गया था, जिसके बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और जिलाधिकारी द्वारा लगभग ₹5 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई थी।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह भवन पूर्ण रूप से सरकारी धन से निर्मित था, इसलिए यह एक राजकीय संपत्ति की श्रेणी में आता है। लेकिन हाल ही में जानकारी मिली है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस भवन को जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना ही ध्वस्त कर दिया और उसी स्थान पर नया निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
नियमों के उल्लंघन का आरोप
अंकित सजवाण का कहना है कि विधायक निधि के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी सरकारी धन से निर्मित परिसंपत्ति को ध्वस्त करने से पहले जिला प्रशासन से उसे ‘निष्प्रोज्य (Condemned)’ घोषित करवाना अनिवार्य होता है। इस मामले में ऐसी कोई अनुमति नहीं ली गई, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
वित्तीय अनियमितता का आरोप
उन्होंने कहा कि बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के राजकीय भवन को तोड़ना घोर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सामग्री के दुरुपयोग का भी आरोप
अंकित सजवाण ने यह भी आरोप लगाया कि पुराने भवन की ईंटों और पत्थरों का उपयोग बिना किसी मूल्यांकन या नीलामी प्रक्रिया के नए निर्माण में किया जा रहा है, जो राजस्व नियमों के विपरीत है।
अंकित सजवाण ने शासन और उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।



